Skip to content

पढ़ने लिखने की हम में जो कमी है

पढ़ने लिखने की हम में जो कमी है |
फिर भी साहस की हम में न कमी है ||

पढ़ने लिखने की कमी को हावी न होने दिया हमने |
इसी से सफलता की राह को सिया हमने ||

फिर भी दुनिया क्यों हमसे जलती है |
मेहनत की राह हमने जो चुनी है ||

पढ़ने लिखने की हम में जो कमी है |फि
र भी साहस की हम में न कमी है ||

ये जो सफलता का द्वार खटखटाया हमने |
मेहनत को औजार बनाया हमने ||

मेरी ये कमी मुझे रोज़ तकलीफ देती है |
शायद इसी से मुझमे साहस की वृद्धि हुई है ||

पढ़ने लिखने की हम में जो कमी है |
फिर भी साहस की हम में न कमी है ||

इस कमी को हराया हमने |
कामयाबी से हाथ मिलाया हमने ||

अब किस बात की हमें कमी है |
राह से हम नहीं हम से राह बनी है ||

पढ़ने लिखने की हम में जो कमी है |
फिर भी साहस की हम में न कमी है ||

Published inकविता

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *