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तेरा इन उँचइयो को पाना और

तेरा इन उँचइयो को पाना और

मेरा कुछ न से कुछ बन जाना इत्तेफाक नहीं हो सकता |

 

दोस्त वो दिन जब तेरे नाम से मेरा नाम जुडा था |

उस दिन हमारा मिलना और

आज तक साथ मिलकर रह जाना इत्तेफाक नहीं हो सकता |

 

दोस्त वो दिन जब कठिनाईयों का पहाड़ हम पे गिरा था |

 

उन कठिनाईयों से जूझना और

उन कठिनाईयों को पार कर जाना इत्तेफाक नहीं हो सकता |

 

दोस्त वो वक़्त जब हमने अच्छा काम किया |

 

उनका काम की तारीफ करना और

अब तक काम देते रहना इत्तेफाक नहीं हो सकता |

तेरा इन उँचइयो को पाना और

मेरा कुछ न से कुछ बन जाना इत्तेफाक नहीं हो सकता |

Published inकविता

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